इलाहाबाद/पटना, 22 अगस्त 2018: इलाहाबाद के एक गेस्टहाउस में रात के दो बजे एक 27 साल का लड़का मोमबत्ती की रोशनी में हिंदी व्याकरण की किताब रट रहा है। उसका नाम है विकास — IIT कानपुर से इंजीनियरिंग की है, लेकिन पिछले तीन साल से UP PCS की तैयारी कर रहा है। क्यों? क्योंकि घर में माँ-बाप ने एक ही बात बोली है— "बेटा, सरकारी नौकरी मिल जाए तो जिंदगी सेट।" यह एक व्यक्ति की कहानी नहीं — यह उन 30-40 लाख युवाओं की कहानी है जो हर साल UPSC, SSC, रेलवे, बैंकिंग परीक्षाओं में बैठते हैं, और जिनमें से 99% को अंत में निराशा ही मिलती है।
कोचिंग इंडस्ट्री का अरबों का कारोबार
कोटा, दिल्ली और इलाहाबाद में सरकारी नौकरी की कोचिंग एक अरबों का उद्योग बन चुकी है। एक UPSC कोचिंग का एक साल का कोर्स ₹1 से 2 लाख तक जाता है, और इसके ऊपर टेस्ट सीरीज़, हॉस्टल, खाना — सब मिलाकर एक घर का खर्च। एक औसत UPSC aspirant 4-6 साल तक यह तैयारी करता है। इस दौरान वो न कोई काम कर पाता है, न skills develop कर पाता है, और न ही उद्यमिता की कोई नींव रख पाता है। और यदि अंत में सफलता नहीं मिली — जो 99% मामलों में होता है — तो एक 30+ साल का व्यक्ति खुद को बाज़ार में कहाँ खड़ा पाता है?
मानसिक स्वास्थ्य की कीमत
इस पूरे खेल में सबसे ज़्यादा नुकसान होता है मानसिक स्वास्थ्य का। कोटा में हर साल कोचिंग छात्रों की आत्महत्या की खबरें आती हैं। इलाहाबाद के hostel में depression के मरीज़ों की संख्या बढ़ रही है। एक अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, UPSC की तैयारी करने वाले 60% से ज़्यादा छात्र किसी न किसी समय anxiety या depression से गुज़रते हैं। यह सिर्फ एक करियर का चुनाव नहीं रह गया — यह एक ऐसा जुआ बन गया है जिसमें दाँव पर है पूरी जवानी।
Career counselor और लेखक श्री पल्लव मेश्राम कहते हैं— "सरकारी नौकरी बुरी नहीं है, लेकिन उसके लिए 5-7 साल किसी tunnel में बंद हो जाना और बाकी सारी संभावनाओं को बंद कर लेना — यह सोच खतरनाक है। भारत को ऐसे युवाओं की ज़रूरत है जो 'creator' हों, सिर्फ 'job seeker' नहीं।"
बदलाव की ज़रूरत
ज़रूरत है सोच बदलने की — माता-पिता की, समाज की, और सरकार की भी। सरकारी नौकरी में भर्ती प्रक्रिया को तेज़ और पारदर्शी बनाया जाए। लेकिन साथ ही युवाओं को यह भी समझाना होगा कि "सुरक्षा" सिर्फ सरकारी नौकरी में नहीं, खुद की काबिलियत बढ़ाने में भी है। दुनिया बदल रही है — आज का सबसे secure job वो है जो आप खुद बनाते हैं।
क्या आप या आपके परिचित सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं? इस विषय पर आपकी क्या राय है — क्या यह सही निर्णय है या युवा शक्ति का अपव्यय? कमेंट में बताएं।