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डिजिटल इंडिया का वो सच जो आपको नहीं बताया जाता: इंटरनेट की रफ़्तार तो बढ़ी, लेकिन क्या साइबर सुरक्षा और डिजिटल साक्षरता में हम फेल हो गए?

नई दिल्ली, 8 जनवरी 2025: प्रधानमंत्री ने जब 2015 में "डिजिटल इंडिया" का शंखनाद किया था, तो सपना था — एक ऐसा भारत जहाँ गाँव का किसान भी सरकारी सेवाएं ऑनलाइन ले सके, जहाँ UPI से लेकर DigiLocker तक सब कुछ एक क्लिक पर हो। आज 2025 में देखें तो UPI ने वाकई दुनिया को चकित कर दिया है — हर महीने 15 हज़ार करोड़ से ज़्यादा के transaction हो रहे हैं। लेकिन इस चमकीली सफलता के पीछे एक अंधेरा पहलू भी है जिसे हम जानबूझकर नज़रअंदाज़ करते रहे हैं। पिछले साल अकेले भारत में साइबर फ्रॉड के 15 लाख से ज़्यादा मामले दर्ज हुए और ₹11,000 करोड़ से ज़्यादा की ठगी हुई।



फोटो साभार: Wikimedia Commons

जितनी तेज़ दौड़ी डिजिटल ट्रेन, उतना पीछे छूटा साइबर ढाँचा

भारत में आज 90 करोड़ से ज़्यादा इंटरनेट यूज़र हैं — यह संख्या सुनने में गर्व की बात लगती है। लेकिन इनमें से कितने लोग जानते हैं कि "Phishing Email" क्या होती है? कितने जानते हैं कि OTP किसी को नहीं देना चाहिए? एक सर्वे के अनुसार भारत के 70% स्मार्टफोन यूज़र कभी न कभी किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक कर चुके हैं। हमने लोगों के हाथों में स्मार्टफोन तो थमा दिया, लेकिन उसे सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल करना नहीं सिखाया। यह वैसा ही है जैसे किसी को गाड़ी की चाबी दे दो लेकिन ड्राइविंग सीखने न दो।

डेटा लीक — भारत का सबसे बड़ा अनकहा संकट

2023 में AIIMS दिल्ली पर ransomware attack हुआ, पूरे अस्पताल की digital प्रणाली ठप हो गई और मरीज़ों के डेटा खतरे में आ गए। CoWIN का डेटा leak हुआ, आधार डेटा के breach की खबरें आती रहती हैं। भारत में अभी भी एक मज़बूत Personal Data Protection Law की प्रतीक्षा है। सरकारी विभागों के server अक्सर पुराने और unpatched software पर चलते हैं। और जब साइबर हमला होता है, तो न पर्याप्त forensic experts हैं, न incident response teams। हम डिजिटल बन गए हैं, लेकिन digitally सुरक्षित नहीं।

साइबर विशेषज्ञ पवन दुग्गल कहते हैं— "भारत दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल democracy बन रहा है, लेकिन हम cyber resilience में अभी भी एक developing nation ही हैं। जब तक स्कूल के curriculum में cyber hygiene नहीं आती, तब तक यह खतरा बढ़ता ही रहेगा।"

उजला पहलू और आगे का रास्ता

फिर भी उम्मीद की किरणें हैं। CERT-In (Computer Emergency Response Team) अब ज़्यादा सक्रिय है, साइबर पुलिस स्टेशन खुल रहे हैं, और कुछ राज्यों में स्कूली पाठ्यक्रम में cyber awareness जोड़ी जा रही है। डिजिटल इंडिया को तभी पूरी सफलता मिलेगी जब हर नागरिक — चाहे शहर का हो या गाँव का — डिजिटल रूप से शिक्षित और सुरक्षित हो।

क्या आप या आपके परिजन कभी साइबर ठगी का शिकार हुए हैं? डिजिटल सुरक्षा को लेकर आपके सुझाव क्या हैं? नीचे कमेंट में ज़रूर लिखें।

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