नई दिल्ली, 3 सितंबर 2024: 23 अगस्त 2023 की शाम 6 बजकर 4 मिनट पर जब चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा, तो इसरो के वैज्ञानिक रो पड़े—खुशी से। पूरा देश जश्न मना रहा था। भारत वह कारनामा कर चुका था जो रूस, अमेरिका और चीन के बाद दुनिया के किसी और देश ने नहीं किया था, और दक्षिणी ध्रुव पर तो इससे पहले कोई भी नहीं पहुँचा था। उस ऐतिहासिक सफलता के बाद देश का एक ही सवाल है—अब क्या? और जवाब उतना ही रोमांचक है जितना सवाल।
गगनयान: जब भारतीय अंतरिक्ष में उड़ेंगे
इसरो का सबसे महत्वाकांक्षी मिशन है गगनयान—भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम। इसमें तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किलोमीटर की कक्षा में 3 दिनों के लिए भेजा जाएगा। इन अंतरिक्ष यात्रियों का चयन हो चुका है—सभी भारतीय वायुसेना के पायलट हैं जो रूस में प्रशिक्षण ले चुके हैं। मिशन के लिए कई Uncrewed परीक्षण उड़ानें पूरी हो चुकी हैं या जारी हैं। अगर यह सफल होता है, तो भारत दुनिया का चौथा देश बन जाएगा जिसने स्वतंत्र रूप से इंसान को अंतरिक्ष में भेजा होगा—अमेरिका, रूस और चीन के बाद।
आदित्य L1 और सूर्य का रहस्य
जिस दिन चंद्रयान-3 ने इतिहास रचा, उसके ठीक एक हफ्ते बाद इसरो ने भारत का पहला सौर मिशन आदित्य L1 लॉन्च किया। यह सूर्य और पृथ्वी के बीच के एक विशेष बिंदु L1 (Lagrange Point) पर स्थापित किया गया है जहाँ से यह बिना किसी रुकावट के सूर्य का अध्ययन करता रहेगा। सूर्य के कोरोना, सौर तूफानों और Space Weather का अध्ययन न सिर्फ वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है—यह धरती के संचार उपग्रहों को सुरक्षित रखने में भी काम आएगा।
भविष्य की झलक: मंगल, शुक्र और उससे आगे
इसरो ने मंगलयान-2 (Mars Orbiter Mission 2) की योजना बनाई है जो पहले से ज़्यादा उन्नत उपकरणों से लैस होगा। शुक्र ग्रह के लिए 'शुक्रयान' मिशन की चर्चा है। और सबसे रोमांचक—चंद्रयान-4, जो चाँद की मिट्टी के नमूने पृथ्वी पर लाएगा। इसके अलावा NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) उपग्रह NASA के साथ मिलकर बनाया जा रहा है जो पृथ्वी की बदलती सतह का नक्शा तैयार करेगा।
"चंद्रयान-3 ने यह साबित कर दिया कि 'Made in India' अंतरिक्ष तकनीक दुनिया की सबसे उन्नत तकनीकों से किसी भी मायने में कम नहीं है। अब हमारा अगला सपना—इंसान को अंतरिक्ष में और फिर चाँद पर भेजना।" — इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ
कम लागत का जादू: दुनिया को क्यों चौंकाता है ISRO
इसरो का सबसे बड़ा जादू है उसकी लागत-दक्षता। चंद्रयान-3 का कुल बजट था लगभग 615 करोड़ रुपये—यानी करीब 75 मिलियन डॉलर। अमेरिका का Apollo 11 मिशन 1969 में हुआ था जिसकी आज की कीमत 280 अरब डॉलर से ज़्यादा होती। NASA का Luna-25 मिशन (जो चंद्रयान-3 से ठीक पहले क्रैश हो गया) 200 मिलियन डॉलर का था। इसरो ने उससे आधी कीमत में वह कर दिखाया जो रूस 50 सालों की कोशिश के बाद भी नहीं कर पाया।
निष्कर्ष: आसमान तो बस शुरुआत है
भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब सिर्फ राष्ट्रीय गर्व का विषय नहीं है—यह एक बड़ा आर्थिक और रणनीतिक मिशन भी है। प्राइवेट स्पेस कंपनियाँ जैसे Skyroot और Agnikul अब उसी रास्ते पर हैं जो एलन मस्क के SpaceX ने अमेरिका में दिखाया। आने वाले 10 साल भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के 'स्वर्णकाल' होंगे। और जो बच्चे आज ISRO की सफलताएँ देखकर बड़े हो रहे हैं—कल वही इन मिशनों पर काम करेंगे।
क्या आप चाहते हैं कि भारत मंगल पर पहले पहुँचे या चाँद पर इंसान भेजे? ISRO का कौन सा मिशन आपको सबसे ज़्यादा उत्साहित करता है? कमेंट्स में बताएं।