नई दिल्ली/स्टॉकहोम, 15 अगस्त 2024: स्वीडन दुनिया का पहला "लगभग cashless" देश बन चुका है — वहाँ के 80% transactions अब digital हैं। China का WeChat Pay और Alipay इतना शक्तिशाली हो चुका है कि वहाँ सड़क पर भिखारी भी QR code से पैसे लेते हैं। और भारत? हमारा UPI सिस्टम दुनिया को चकित कर चुका है। हर महीने 1,000 करोड़ से ज़्यादा digital transactions — यह एक उपलब्धि है जिस पर हम सही गर्व करते हैं। लेकिन इस cashless क्रांति के साथ एक ऐसा खतरा भी आया है जिसकी बात बहुत कम की जाती है — आपकी हर खरीद, हर payment, हर financial decision अब किसी के server पर दर्ज हो रही है।
आपका पैसा नहीं, आपका data बिक रहा है
जब आप UPI से सब्ज़ी खरीदते हैं, Amazon से कुछ order करते हैं, या Swiggy से खाना मँगाते हैं — इन सभी transactions का data कहाँ जाता है? यह data आपकी spending habits, lifestyle, health choices, political leanings और यहाँ तक कि आपकी आर्थिक स्थिति को reveal करता है। अमेरिका में यह पहले से हो रहा है — Target retail chain ने एक बार एक teenager की pregnancy का अनुमान उसके shopping pattern से लगा लिया था, इससे पहले कि उसके पिता को पता चले। यह कोई science fiction नहीं — यह "predictive analytics" की ताकत है जो आपकी हर digital movement को track करती है।
सरकारी निगरानी का खतरा
China में "Social Credit System" एक कुख्यात उदाहरण है — जहाँ नागरिकों की digital activities के आधार पर उन्हें "score" दिया जाता है और उनके अधिकार तय किए जाते हैं। भारत में ऐसा नहीं है, लेकिन Aadhaar-linked financial transactions, CBDC (Central Bank Digital Currency) की तैयारी — ये सब बताते हैं कि सरकार के पास नागरिकों की financial activities की पूरी picture बनाने की क्षमता आ रही है। यह tax evasion रोकने के लिए अच्छा है, लेकिन क्या इसका दुरुपयोग भी हो सकता है?
Privacy advocate और EFF (Electronic Frontier Foundation) की डायरेक्टर Cindy Cohn का कहना है— "Cash का गायब होना सिर्फ एक payment method का गायब होना नहीं है — यह anonymity का अंत है। जब हर लेनदेन trace होने लगे, तो स्वतंत्र समाज का एक ज़रूरी स्तंभ ढह जाता है।"
सुविधा और सुरक्षा में संतुलन
इसका मतलब यह नहीं कि digital payment बुरा है — इसके फायदे भ्रष्टाचार कम करने से लेकर financial inclusion तक अनेक हैं। लेकिन ज़रूरत है एक मज़बूत Personal Data Protection Law की, Right to Privacy को digital space में legally enforce करने की, और नागरिकों को यह अधिकार देने की कि वो तय कर सकें उनका data कैसे इस्तेमाल हो। सुविधा और privacy — दोनों एक साथ पाई जा सकती हैं, बशर्ते इरादा सही हो।
क्या आप भी digital payment के privacy खतरों को लेकर चिंतित हैं? या आपको लगता है यह tradeoff सुविधा के लिए उचित है? अपनी राय नीचे कमेंट में लिखें।