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इंसान बनाम मशीन: क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सच में आपकी नौकरी खा जाएगा या इंसानियत को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा?

नई दिल्ली, 15 मार्च 2024: बेंगलुरु की एक सॉफ्टवेयर कंपनी ने पिछले महीने अपने 50 जूनियर डेवलपर्स को नोटिस दिया—"आपकी सेवाएँ अब AI कर लेगा।" दिल्ली के एक न्यूज़ चैनल ने अपने 3 कंटेंट राइटर्स को हटाकर ChatGPT की सब्सक्रिप्शन ले ली। मुंबई के एक बैंक ने अपनी 200 कस्टमर केयर सीटें खाली करके AI चैटबॉट लगा दिया। और दूसरी तरफ, उसी AI की वजह से एक नया पेशा जन्मा—'Prompt Engineer'—जिसकी सालाना तनख्वाह एक करोड़ रुपये से ज़्यादा है। तो क्या AI दुश्मन है या दोस्त? कहानी इतनी सरल नहीं है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसान बनाम मशीन
फोटो साभार: Unsplash (Free to use)

कौन सी नौकरियाँ जाएंगी? कौन सी बचेंगी?

McKinsey Global Institute की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक दुनिया की 30% नौकरियाँ ऑटोमेशन से प्रभावित होंगी। लेकिन यह भी सच है कि 'Automation' और 'AI' में फर्क है। जो काम दोहराव वाले हैं, नियम-आधारित हैं—जैसे डेटा एंट्री, असेंबली लाइन काम, बेसिक अकाउंटिंग, कस्टमर केयर स्क्रिप्ट—वे जाएंगे। लेकिन जो काम रचनात्मकता, सहानुभूति, जटिल समस्या-समाधान और इंसानी समझ माँगते हैं—वे बचेंगे और बढ़ेंगे। एक AI अभी भी किसी रोते बच्चे को चुप नहीं करा सकता, किसी मरीज़ के डर को महसूस नहीं कर सकता, या किसी खाली कागज़ पर कविता लिखने की ललक नहीं रख सकता।

भारत के लिए खास चुनौती

भारत की एक बड़ी ताकत जो "demographic dividend" रही है—यानी युवा और सस्ता श्रम—वही AI की वजह से कमज़ोर पड़ सकती है। BPO, IT सर्विस, डेटा प्रोसेसिंग—ये सेक्टर जो लाखों भारतीयों को रोज़गार देते हैं, AI के सबसे बड़े निशाने पर हैं। NASSCOM की रिपोर्ट बताती है कि भारत के IT सेक्टर में अगले 5 साल में 30-40% काम AI-असिस्टेड हो जाएगा। इसका मतलब यह नहीं कि सब नौकरियाँ जाएंगी, लेकिन जो लोग AI के साथ काम करना सीखेंगे, वे आगे रहेंगे—और जो नहीं सीखेंगे, वे पीछे रह जाएंगे।

AI के चमत्कार: जो इंसान नहीं कर सकता

लेकिन सिर्फ 'नौकरी जाने' की बात करना आधा सच है। AI ने कुछ ऐसी चीज़ें की हैं जो इंसानी इतिहास में पहले कभी संभव नहीं थीं। DeepMind के AlphaFold ने लाखों प्रोटीन की संरचना सुलझा दी जो वैज्ञानिक दशकों में नहीं सुलझा पाए—इससे कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की दवाएँ बनाने का रास्ता खुल गया। AI ने शतरंज के सबसे महान खिलाड़ियों को हरा दिया, लेकिन इससे शतरंज खत्म नहीं हुआ—बल्कि लोग और उत्साह से शतरंज खेल रहे हैं। AI किसान को फसल की बीमारी पहचानने में मदद कर रहा है, डॉक्टर को कैंसर के शुरुआती संकेत दिखा रहा है, और बच्चों को उनकी रफ्तार से पढ़ा रहा है।

"AI आपकी नौकरी नहीं लेगा। लेकिन वह इंसान ज़रूर लेगा जो AI का इस्तेमाल करना जानता हो।" — IBM के CEO, अरविंद कृष्णा

नई पीढ़ी के लिए संदेश

अगर आप 2024 में कॉलेज में हैं या अभी करियर शुरू कर रहे हैं, तो AI आपके लिए खतरा नहीं, मौका है—अगर आप सही रवैया रखें। AI टूल्स सीखें, लेकिन सिर्फ AI पर निर्भर मत हो जाएं। अपनी रचनात्मकता, अपनी मानवीय समझ, अपनी भावनात्मक बुद्धिमत्ता को तराशते रहें—क्योंकि यही वह चीज़ है जो मशीनें कभी नहीं सीख सकतीं। इतिहास गवाह है—जब भी तकनीकी क्रांति आई, कुछ पेशे खत्म हुए, लेकिन कुछ नए और बेहतर पेशे भी जन्मे।

निष्कर्ष: डर नहीं, तैयारी ज़रूरी है

AI इतिहास की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति है—उससे भी बड़ी जो बिजली या इंटरनेट ने लाई थी। यह डरने की नहीं, तैयार होने की बात है। जो समाज, जो देश, जो इंसान AI को अपनाकर उसके साथ चलना सीखेगा—वह आगे रहेगा। और जो इससे मुँह मोड़ेगा—वह पीछे रह जाएगा। चुनाव आपका है।

क्या आपकी नौकरी AI से खतरे में है? या आप AI को अपने काम में इस्तेमाल करते हैं? अपना अनुभव कमेंट्स में बताएं।

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