नई दिल्ली, 2 फरवरी 2024: सुबह की चाय बनाने बैठे तो चाय की पत्ती 20% महंगी हो चुकी थी। बच्चे को स्कूल छोड़ने जाए तो पेट्रोल ₹100 पार कर चुका है। महीने के अंत में जब बैंक का statement खोला तो EMI, बिजली बिल, किराना और बच्चों की फीस — सब मिलाकर सैलरी का 80% खर्च हो चुका था। यह कहानी किसी एक परिवार की नहीं — यह भारत के उस करोड़ों "मिडिल क्लास" की कहानी है जो न BPL कार्ड पाने के लिए "गरीब" है, और न ही महंगाई को झेलने के लिए "अमीर"। वो बस पीस रहा है — चुपचाप, बिना किसी सब्सिडी के, बिना किसी सरकारी योजना के।
नंबर झूठ नहीं बोलते
RBI के आँकड़े कहते हैं कि पिछले पाँच सालों में खाने-पीने की चीज़ों की कीमतें औसतन 6-7% सालाना की दर से बढ़ी हैं। लेकिन जो महंगाई "आम आदमी" महसूस करता है, वो इससे कहीं ज़्यादा है। टमाटर ₹200 प्रति किलो, प्याज़ ₹80, दाल ₹150 — यह कोई एक बार की बात नहीं, यह एक नया नॉर्मल बन गया है। अब इसमें जोड़िए होम लोन की EMI, जिसकी दरें RBI के रेपो रेट बढ़ाने के बाद आसमान छू चुकी हैं। एक ₹50 लाख के होम लोन पर मासिक EMI, जो 2021 में ₹38,000 थी, वो अब ₹47,000 से ऊपर है। यानी हर महीने ₹9,000 का अतिरिक्त झटका।
मिडिल क्लास की मजबूरी — खर्च काटो, सपने छोड़ो
नोएडा में एक IT कंपनी में काम करने वाले रमेश यादव बताते हैं, "मेरी तनख्वाह ₹60,000 है। इसमें से ₹18,000 किराया, ₹15,000 EMI, ₹8,000 बच्चों की फीस, ₹10,000 राशन-पेट्रोल — बचता क्या है? विदेश घूमना तो छोड़ो, बच्चे को अच्छे coaching में भेजने के लिए पैसे नहीं जुटा पाते।" यह बात सिर्फ रमेश की नहीं है। CMIE (Centre for Monitoring Indian Economy) के डेटा के अनुसार भारत में घरेलू बचत दर, जो 1980 के दशक में 20% के ऊपर थी, वो अब घटकर इतिहास के सबसे निचले स्तर पर आ चुकी है।
अर्थशास्त्री और 'इंडिया आफ्टर मोदी' के लेखक आशुतोष वार्ष्णेय का मानना है— "भारत में मिडिल क्लास सबसे ज़्यादा टैक्स देता है, सबसे कम सब्सिडी पाता है, और सबसे ज़्यादा महंगाई झेलता है। यही वर्ग लोकतंत्र की रीढ़ है, लेकिन राजनीतिक दलों के लिए यह अक्सर अदृश्य है।"
रास्ता क्या है?
विशेषज्ञ कहते हैं कि मिडिल क्लास को खुद भी अपनी आर्थिक रणनीति बदलनी होगी — SIP, mutual funds और passive income के तरीके अपनाने होंगे। लेकिन जब हर महीने का गणित ही बिगड़ा हो, तो "निवेश" कहाँ से होगा? सरकार को भी मिडिल क्लास के लिए टैक्स राहत, EMI सब्सिडी और किफायती घर की योजनाएं लानी होंगी। वरना वो दिन दूर नहीं जब यह "मूक बहुमत" अपनी चुप्पी तोड़ेगा।
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