लंदन/टोक्यो/बेंगलुरु, 19 मई 2023: हर शुक्रवार को ऑफिस बंद। तीन दिन की छुट्टी। उतनी ही तनख्वाह। यह सुनने में किसी परीलोक की कहानी लगती है, लेकिन UK में 60 से ज़्यादा कंपनियों ने यह experiment किया — और नतीजे चौंकाने वाले थे। Cambridge और Boston College की joint study में पाया गया कि 4-day work week अपनाने वाली कंपनियों में productivity में कोई कमी नहीं आई, बल्कि कर्मचारियों की mental health, job satisfaction और retention में ज़बरदस्त सुधार हुआ। लेकिन जब यही सवाल भारतीय कंपनियों के सामने रखा जाता है, तो ज़्यादातर HR managers मुस्कुरा देते हैं — जैसे कोई मासूम बच्चे ने कोई भोली-भाली बात कही हो।
दुनिया में क्या हो रहा है?
Iceland ने 2019-2021 के बीच एक large-scale pilot किया जिसमें 2,500 सरकारी कर्मचारियों को 4-day week पर काम कराया गया। नतीजा — productivity समान रही और employees की wellbeing में नाटकीय सुधार आया। इसके बाद Iceland के 86% कर्मचारियों को shorter hours की सुविधा मिल गई। Japan में Microsoft ने 2019 में 4-day week का trial किया और productivity में 40% की बढ़ोतरी देखी। New Zealand की एक कंपनी Perpetual Guardian ने permanent 4-day week लागू किया। धीरे-धीरे यह सिद्ध होता जा रहा है कि "ज़्यादा घंटे = ज़्यादा काम" का equation गलत है।
भारत में क्या बाधाएं हैं?
भारत में work culture की एक अजीब paradox है — यहाँ "busy दिखना" ही "productive होना" माना जाता है। सबसे आखिर में office छोड़ने वाले को "hardworking" का ताज मिलता है। इसके अलावा भारत में Labour Laws पुराने हैं, और Manufacturing तथा Services जैसे क्षेत्रों में 4-day week की व्यवहारिकता भी अलग-अलग है। एक factory worker के लिए 4-day week का मतलब है 10-घंटे की shift — जो उल्टा नुकसानदायक हो सकता है। और भारत जैसे competitive job market में कर्मचारी खुद भी यह नहीं माँगते, डर लगता है कि कहीं "कम मेहनती" न दिख जाएं।
Harvard Business Review की researcher Ashley Whillans का निष्कर्ष है— "दुनिया के सबसे innovative और productive देश वो नहीं हैं जहाँ लोग सबसे ज़्यादा घंटे काम करते हैं, बल्कि वो हैं जहाँ लोगों को सबसे अच्छा आराम और autonomy मिलता है।"
भारत के लिए क्या सबक?
भारत को अभी 4-day work week लागू करने की ज़रूरत नहीं, लेकिन "outcome-based work culture" की तरफ बढ़ने की ज़रूरत ज़रूर है। यानी यह मत देखो कि कर्मचारी कितने घंटे ऑफिस में रहा, यह देखो कि उसने क्या achieve किया। यह बदलाव धीरे-धीरे आ रहा है — IT companies में remote work और flexible timings इसी दिशा में पहला कदम है। लेकिन असली बदलाव तभी आएगा जब Indian bosses की mentality बदलेगी।
क्या आप 4-day work week के पक्ष में हैं? क्या आपकी कंपनी इसे अपनाएगी तो productivity पर असर पड़ेगा? अपने अनुभव और विचार कमेंट में साझा करें।