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ChatGPT और स्मार्ट बॉट्स का दौर: स्कूल के होमवर्क से लेकर ऑफिस की कोडिंग तक, कैसे एक सॉफ्टवेयर हमारी सोचने की क्षमता को बदल रहा है

नई दिल्ली, 12 जनवरी 2023: नवंबर 2022 के आखिरी हफ्ते में एक सॉफ्टवेयर लॉन्च हुआ जिसने महज़ 5 दिनों में 10 लाख यूज़र्स का रिकॉर्ड तोड़ दिया—Netflix को यह मील का पत्थर छूने में 3.5 साल लगे थे, Instagram को डेढ़ साल। उस सॉफ्टवेयर का नाम था ChatGPT। और तब से दुनिया पहले जैसी नहीं रही। दिल्ली के एक 10वीं के छात्र ने अपना पूरा इतिहास का प्रोजेक्ट ChatGPT से लिखवाया। मुंबई के एक वकील ने 3 घंटे का कानूनी ड्राफ्ट 10 मिनट में तैयार कर लिया। हैदराबाद की एक स्टार्टअप ने अपने पूरे मार्केटिंग कंटेंट का काम एक AI को सौंप दिया। यह क्रांति है या आत्मसमर्पण?



फोटो साभार: Unsplash (Free to use)

ChatGPT क्या है, और इसने क्या बदल दिया?

ChatGPT एक 'Large Language Model' है जिसे OpenAI ने बनाया है। इसे इंटरनेट पर मौजूद अरबों पन्नों के टेक्स्ट पर ट्रेन किया गया है। नतीजा? यह निबंध लिख सकता है, कोड बना सकता है, गणित हल कर सकता है, अनुवाद कर सकता है, और किसी भी सवाल का विस्तृत जवाब दे सकता है—इंसान जैसी भाषा में। पहले इंटरनेट ने जानकारी लोकतांत्रिक की। अब ChatGPT 'विशेषज्ञता' को लोकतांत्रिक बना रहा है। एक छोटे शहर का बच्चा जिसके पास कोचिंग नहीं है, वह अब AI से पढ़ सकता है। एक उद्यमी जो कानूनी सलाह नहीं खरीद सकता, वह AI से बुनियादी मार्गदर्शन ले सकता है।

स्कूलों में भूचाल: नकल या नई पढ़ाई?

दुनिया के स्कूलों और विश्वविद्यालयों में ChatGPT ने एक नई बहस छेड़ दी है। न्यूयॉर्क के पब्लिक स्कूलों ने ChatGPT बैन कर दिया। भारत के कई IIT और NIT प्रोफेसर अपने छात्रों के असाइनमेंट देखकर हैरान हैं—"यह लिखावट इस छात्र की नहीं लग रही।" लेकिन कुछ शिक्षक इसे अलग नज़र से देखते हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रमेश शर्मा कहते हैं, "कैलकुलेटर आने पर लोगों ने कहा था कि बच्चे जोड़-घटाव भूल जाएंगे। हुआ क्या? बच्चों ने उस बचे हुए समय में ज़्यादा जटिल गणित सीखी। ChatGPT भी वैसे ही है—ज़रूरत है कि हम होमवर्क की परिभाषा बदलें।"

खतरे: जब AI झूठ बोले

ChatGPT की एक बड़ी कमज़ोरी है—यह कभी-कभी बिल्कुल आत्मविश्वास के साथ गलत जानकारी देता है। इसे 'Hallucination' कहते हैं। एक अमेरिकी वकील ने कोर्ट में ChatGPT से लिखी दलीलें पेश कीं जिसमें ऐसे court cases का हवाला था जो कभी हुए ही नहीं थे। वकील को बुरी तरह फटकार मिली। इसके अलावा, अगर करोड़ों लोग एक ही AI से जानकारी ले रहे हों, तो क्या सोचने के तरीके एक जैसे नहीं हो जाएंगे? क्या हम एक 'Intellectual Monoculture' की तरफ बढ़ रहे हैं जहाँ मानवता की विविधता खो जाएगी?

"ChatGPT एक बहुत ताकतवर कैलकुलेटर है—शब्दों का। जैसे कैलकुलेटर आपके लिए जोड़ता है लेकिन सोचता नहीं, ChatGPT आपके लिए लिखता है लेकिन समझता नहीं। फर्क यही है जो इंसान को खास बनाता है।" — AI शोधकर्ता, डॉ. अनिल सेठ

भारतीय भाषाओं में AI: अभी भी लंबा सफर

ChatGPT हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में काम करता है, लेकिन अभी भी इसकी गुणवत्ता अंग्रेज़ी जैसी नहीं है। भारत की 80 करोड़ से ज़्यादा आबादी जो इंटरनेट इस्तेमाल करती है, उसके लिए असली AI क्रांति तब आएगी जब यह उनकी मातृभाषा में उतनी ही सटीकता से काम करे। Google, Microsoft और कुछ भारतीय स्टार्टअप्स इस दिशा में काम कर रहे हैं—लेकिन रास्ता लंबा है।

निष्कर्ष: हथियार हमारे हाथ में है

ChatGPT और उसके जैसे AI टूल्स वह आईना हैं जो हमें दिखाते हैं कि हम क्या हैं—और क्या हो सकते हैं। यह हथियार किसके काम आएगा, यह हम तय करते हैं। अगर हम इसका इस्तेमाल सोचने से बचने के लिए करेंगे, तो यह हमें कमज़ोर बनाएगा। अगर इसका इस्तेमाल और गहरा सोचने के लिए करेंगे, तो यह हमें अपराजेय बनाएगा।

क्या आपने ChatGPT या किसी AI टूल का इस्तेमाल किया है? आपका अनुभव कैसा रहा? कमेंट्स में बताएं।

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