नई दिल्ली, 4 मार्च 2022: रूस ने यूक्रेन पर हमला किया और अगले ही हफ्ते मुंबई की एक गृहिणी माया पाटिल को सूरजमुखी तेल की बोतल पर ₹40 ज़्यादा चुकाने पड़े। पुणे के एक ट्रक ड्राइवर अशोक जाधव ने पेट्रोल पंप पर देखा कि ₹100 पार कर चुकी कीमत अब ₹106 हो गई है। लखनऊ में एक मध्यमवर्गीय परिवार को LPG cylinder के लिए अब ₹1,000 से ज़्यादा देने पड़ रहे हैं। इन सबके बीच एक सवाल उठता है — यूक्रेन-रूस युद्ध और भारत के बीच 7,000 किलोमीटर का फासला है, फिर भी इस जंग की आग भारत के आम घरों की रसोई तक कैसे पहुंच गई?
ग्लोबल सप्लाई चेन का जाल
रूस और यूक्रेन दुनिया के सबसे बड़े गेहूं निर्यातकों में से हैं — मिलकर वो दुनिया की 30% गेहूं सप्लाई करते हैं। रूस दुनिया के तेल और gas उत्पादन में 12% हिस्सेदारी रखता है। यूक्रेन का सूरजमुखी तेल global market का 46% है। जब युद्ध शुरू हुआ, ये सारी supply chains टूट गईं। Crude oil की कीमत $140 प्रति barrel छू गई। अनाज और खाद्य तेलों की global prices आसमान पर पहुंच गईं। और भारत, जो इनमें से कई चीज़ें import करता है, उसे यह मार सीधे झेलनी पड़ी। यह बताता है कि आज की दुनिया में कोई भी देश किसी से अलग नहीं रह सकता — globalization की ताकत और कमज़ोरी दोनों यही हैं।
भारत की मजबूरी और चतुराई
भारत ने इस संकट में एक चतुर राजनीतिक-आर्थिक खेल खेला। अमेरिका और यूरोप के दबाव के बावजूद भारत ने रूसी तेल खरीदना जारी रखा — और discount पर। इससे भारत को कुछ राहत मिली। लेकिन फिर भी inflation का बोझ आम जनता पर पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को इस अनुभव से सीखते हुए अपनी energy security और food security को और मज़बूत करना होगा, ताकि भविष्य में किसी दूसरे देश की जंग का खमियाज़ा हमारे नागरिकों को न भुगतना पड़े।
विदेश नीति विशेषज्ञ C. Raja Mohan का कहना है— "यूक्रेन युद्ध ने दुनिया को एक नई सच्चाई दिखाई है — भूगोल मायने नहीं रखता, supply chain मायने रखती है। जो देश अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को diversify नहीं करते, वो किसी भी वैश्विक संकट में कमज़ोर पड़ जाते हैं।"
आगे क्या?
जब तक दुनिया में युद्ध और संघर्ष रहेंगे, तब तक आम भारतीय की रसोई का बजट उनसे प्रभावित होता रहेगा। इसलिए ज़रूरी है कि भारत सौर ऊर्जा और renewable energy की तरफ तेज़ी से कदम बढ़ाए, कृषि उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाए, और global supply chains में एक मज़बूत खिलाड़ी के रूप में उभरे — ताकि भविष्य में हम दूसरों की जंग के शिकार नहीं बल्कि उसके हल का हिस्सा बनें।
यूक्रेन या किसी और वैश्विक संकट ने आपके घर के बजट को कैसे प्रभावित किया? क्या आपको लगता है भारत को ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के मामले में और आत्मनिर्भर होना चाहिए?