24 मार्च 2020: क्या आपने कभी सोचा था कि एक ऐसा दिन आएगा जब ट्रेनें पटरियों पर थम जाएंगी, हवाई जहाज जमीन पर खड़े हो जाएंगे और भारत की 130 करोड़ की आबादी अपने घरों में कैद हो जाएगी? आज रात 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संदेश में एक ऐसा ऐलान किया है जिसने हर भारतीय की रूह कंपा दी है। कोरोना वायरस (COVID-19) की अदृश्य महामारी से लड़ने के लिए, आज रात 12 बजे से अगले 21 दिनों के लिए पूरा भारत लॉकडाउन (Lockdown) रहेगा।
"जान है तो जहान है"
हाथ जोड़कर पीएम मोदी ने देशवासियों से अपील की— "घर से बाहर निकलने के बारे में भूल जाइए। अपने घर के दरवाजे पर एक लक्ष्मण रेखा खींच लीजिए।" उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हमने ये 21 दिन नहीं संभाले, तो देश 21 साल पीछे चला जाएगा। यह फैसला इतना सख्त था कि कर्फ्यू जैसा माहौल बन गया है। सड़कों पर पुलिस के सायरन और लाठियों की आवाजें सुनाई दे रही हैं।
राशन की दुकानों पर अफरातफरी
जैसे ही लॉकडाउन की खबर आई, किराना दुकानों और मेडिकल स्टोर्स पर लंबी कतारें लग गईं। लोग चावल, आटा, दाल और सबसे ज्यादा 'मैगी' खरीदने के लिए टूट पड़े। अनिश्चितता का डर लोगों के चेहरों पर साफ दिख रहा है। किसी को नहीं पता कि यह वायरस कब तक रहेगा और क्या यह 21 दिन का वनवास वाकई 21 दिन में खत्म होगा?
प्रकृति की वापसी और प्रवासी मजदूरों का दर्द
जहां एक तरफ शहरों में सन्नाटा पसर गया है और हवा इतनी साफ हो गई है कि जालंधर से हिमालय की चोटियां दिखने लगी हैं, वहीं दूसरी तरफ एक मानवीय त्रासदी भी जन्म ले रही है। लाखों दिहाड़ी मजदूर, जिनका काम बंद हो गया है, पैदल ही अपने गांवों की ओर निकल पड़े हैं। सिर पर बोझा और गोद में बच्चे लिए ये तस्वीरें आने वाले कई सालों तक हमें परेशान करेंगी।
थाली, ताली और दीये: एकजुटता का नया तरीका
डर के इस माहौल में उम्मीद की एक किरण भी दिखी। 'जनता कर्फ्यू' के दिन शाम 5 बजे जब पूरा देश अपनी बालकनी में आकर डॉक्टरों और पुलिसकर्मियों के लिए तालियां और थालियां बजा रहा था, तो लगा कि हम इस जंग में अकेले नहीं हैं।
निष्कर्ष: एक नई दुनिया की शुरुआत
आज से हमारी दुनिया बदल गई है। अब 'मास्क' और 'सैनिटाइजर' हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा होंगे। 'सोशल डिस्टेंसिंग' (दो गज दूरी) अब नया मंत्र है। क्या हम इस अदृश्य दुश्मन को हरा पाएंगे?
लॉकडाउन के उन 21 दिनों में आपने अपना समय कैसे बिताया? क्या आपने कोई नई स्किल सीखी या बस रामायण और महाभारत देखकर दिन काटे? अपनी यादें कमेंट्स में साझा करें।