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जब न्यूयॉर्क का आसमान काला हो गया: वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से टकराए विमान, दुनिया ने देखा तबाही का सबसे खौफनाक मंजर

न्यूयॉर्क, 11 सितंबर 2001: आज सुबह अमेरिका के पूर्वी तट (East Coast) पर आसमान बिल्कुल साफ और नीला था। लोग अपनी कॉफी पीते हुए ऑफिस जा रहे थे, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले कुछ पलों में यह नीला आसमान धुएं, धूल और चीखों के काले गुबार में बदल जाएगा। आज मानवता ने नफरत का वह चेहरा देखा है जिसे भुलाने में शायद सदियां लग जाएंगी। इतिहास ने आज करवट ली है, और दुनिया अब कभी पहले जैसी नहीं रहेगी।



फोटो साभार: Michael Foran / Wikimedia Commons

"यह कोई हादसा नहीं, यह हमला है"

स्थानीय समयानुसार सुबह 8:46 बजे, अमेरिकन एयरलाइंस का एक विमान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के उत्तरी टॉवर (North Tower) से टकराया। पहले लोगों को लगा कि यह एक भयानक विमान दुर्घटना है। टीवी चैनल लाइव कवरेज दिखा रहे थे, तभी ठीक 17 मिनट बाद, सुबह 9:03 बजे, एक दूसरा विमान यूनाइटेड एयरलाइंस फ्लाइट 175, कैमरों के सामने दक्षिणी टॉवर (South Tower) में जा घुसा।

उस पल, एंकर की आवाज़ कांप गई और दुनिया को समझ आ गया— यह हादसा नहीं, अमेरिका पर सुनियोजित हमला है।

ताश के पत्तों की तरह ढह गई शान

अगले 102 मिनटों में जो हुआ, उसने किसी प्रलय की याद दिला दी। 110 मंजिला जुड़वां इमारतें (Twin Towers), जो कभी अमेरिका की आर्थिक ताकत का प्रतीक थीं, देखते ही देखते मलबे के ढेर में बदल गईं। कंक्रीट के जंगल में जान बचाने के लिए भागते लोग, धूल से सने चेहरे (Dust Lady), और खिड़कियों से मदद की गुहार लगाते लोग—ये दृश्य किसी डरावनी फिल्म से भी ज्यादा भयानक थे।

अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने फ्लोरिडा के एक स्कूल से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा, "आज हमारी स्वतंत्रता पर हमला हुआ है। हम इन कायरों को ढूंढ निकालेंगे। अमेरिका डरेगा नहीं, हम बदला लेंगे।"

डर का नया दौर: दुनिया बदल गई

पेंटागन (Pentagon) पर भी एक विमान गिराया गया है और एक विमान पेंसिल्वेनिया के खेतों में क्रैश हुआ है, जिसे यात्रियों ने आतंकियों से लड़ने की कोशिश में गिरा दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों के पीछे ओसामा बिन लादेन और अल-कायदा का हाथ है।

इस हमले ने न केवल 3000 से ज्यादा बेगुनाह लोगों की जान ली है, बल्कि हवाई यात्रा और सुरक्षा के नियम हमेशा के लिए बदल दिए हैं। अब हम एक ऐसी दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं जहाँ 'आतंकवाद' हर देश की सबसे बड़ी चुनौती होगा।

निष्कर्ष

मलबे (Ground Zero) से अभी भी धुआं उठ रहा है। यह हमला ईंट-पत्थरों पर नहीं, बल्कि मानव सभ्यता और स्वतंत्रता पर था। न्यूयॉर्क का जज्बा बताता है कि शहर फिर खड़ा होगा, लेकिन घाव बहुत गहरे हैं।

इस काले दिन पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है? क्या आपको लगता है कि दुनिया अब कभी सुरक्षित महसूस कर पाएगी?

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