लखनऊ। संत कबीर दास की 639वीं जयंती के अवसर पर सोमवार को उद्यान विभाग के प्रेक्षा गृह में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। वक्ताओं ने संत कबीर के जीवन, उनके दर्शन और समाज को दिए गए अमूल्य संदेशों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि आज के दौर में उनके विचार मानवता के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता हैं। समारोह की अध्यक्षता सेवा निवृत्त अधिशासी अभियंता इंजीनियर राजेंद्र प्रसाद सोनवानी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) एवं राज्यसभा सांसद माननीय बृज लाल उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और संत कबीर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मुख्य कोषाधिकारी लखनऊ श्रीमती साधना कोरी, कोरी/कोली समाज उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष भगवान दीन शंखवार तथा भंते दीपांकर मौजूद रहे। सभी अतिथियों ने संत कबीर के विचारों को समाज के लिए प्रेरणादायक बताते हुए उनके संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया। समारोह को महाबीर प्रसाद, सेल टैक्स विभाग के डिप्टी कमिश्नर के.पी. चौधरी, प्रतापगढ़ कोरी समाज के जिलाध्यक्ष राजा राम कोरी, मनीराम प्रबुद्ध, उत्तर प्रदेश कोरी संस्थान के अध्यक्ष राम सजीवन कोरी, समाजसेवी अरविंद शाक्य तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सरजू राम राव ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि संत कबीर ने अपने दोहों और वाणी के माध्यम से समाज में फैली कुरीतियों, अंधविश्वास और जातिगत भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई थी। उनका संदेश आज भी समाज को सही दिशा दिखाने का कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम के आयोजक किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के प्रोफेसर डॉ. हरी राम ने कहा कि वर्तमान समय में समाज नफरत, हिंसा और वैचारिक विभाजन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में संत कबीर की शिक्षाएं पहले से अधिक प्रासंगिक हो गई हैं। उन्होंने कहा कि संत कबीर ने पूरी दुनिया को प्रेम, करुणा और भाईचारे का संदेश दिया। यदि समाज उनके बताए मार्ग पर चले तो आपसी मतभेद और सामाजिक तनाव काफी हद तक समाप्त हो सकते हैं।
मुख्य अतिथि एवं राज्यसभा सांसद बृज लाल ने अपने संबोधन में भगवान गौतम बुद्ध और संत कबीर के जीवन दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों महापुरुषों ने मानवता, सत्य, समानता और करुणा का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि संत कबीर ने अपने विचारों से समाज को जोड़ने का कार्य किया और आज भी उनके संदेश समाज में एकता स्थापित करने की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने कहा कि संत कबीर का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्चा धर्म मानवता की सेवा और सभी के प्रति समान व्यवहार में निहित है। उनके विचार किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संपूर्ण मानव समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
समारोह में लखनऊ, कानपुर, रायबरेली, प्रतापगढ़ सहित कई जनपदों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। उपस्थित लोगों ने संत कबीर के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का संचालन गन्ना संस्थान के सेवा निवृत्त उप निदेशक डॉ. नवल किशोर कमल ने किया। उन्होंने अपने प्रभावशाली संचालन के माध्यम से संत कबीर के जीवन से जुड़े अनेक प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख किया। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया।
समारोह के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि संत कबीर ने अपने जीवन में कभी भी जाति, धर्म या ऊंच-नीच के आधार पर भेदभाव नहीं किया। उन्होंने हमेशा इंसानियत, प्रेम और सामाजिक समानता का संदेश दिया। यही कारण है कि सदियों बाद भी उनके विचार समाज को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं। कार्यक्रम का समापन संत कबीर के आदर्शों को अपनाने और समाज में प्रेम, भाईचारा तथा सामाजिक एकता को मजबूत करने के संकल्प के साथ हुआ।
